
बिलासपुर।
पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे के नाम पर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करने का एक मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र से सामने आया है। नाली निर्माण कार्य को लेकर तथ्यों की पुष्टि किए बिना भ्रामक खबर प्रसारित करने के आरोप में एक पत्रकार के खिलाफ पुलिस ने नॉन कॉग्निजेबल रिपोर्ट (NCR) दर्ज की है।
थाना सिरगिट्टी में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोप लगाया कि क्षेत्र में चल रहे शासकीय नाली निर्माण कार्य को लेकर पत्रकार रविंद्र विश्वकर्मा द्वारा मौके पर पहुंचकर वीडियो बनाया गया और उसे अधूरी, एकतरफा व गलत जानकारी के साथ प्रचारित किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्माण कार्य संबंधित इंजीनियर और विभागीय अधिकारियों के निर्देशानुसार नियमानुकूल किया जा रहा था।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि खबर चलाने से पहले न तो विभाग से पुष्टि की गई और न ही वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया गया, जिससे यह मामला सूचना देने की बजाय भ्रम फैलाने और सनसनी पैदा करने का प्रतीत होता है।
बताया गया कि उक्त भ्रामक प्रस्तुति के कारण न केवल संबंधित विभाग की छवि प्रभावित हुई, बल्कि आम नागरिकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी। शिकायतकर्ता द्वारा संपर्क करने के प्रयास के बावजूद आरोपी पत्रकार ने संवाद स्थापित नहीं किया।
इसी बीच, जब हमारी टीम ने पूरे मामले की गहन पड़ताल की, तो यह जानकारी सामने आई कि कथित खबर को बढ़ावा देने के पीछे कुछ नगर निगम के कर्मचारियों और कुछ स्थानीय नेताओं के संरक्षण की भी चर्चा क्षेत्र में है। सूत्रों के अनुसार, आपसी हितों और दबाव की राजनीति के चलते निर्माण कार्य को गलत रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।
शिकायतकर्ता द्वारा इस पूरे मामले से संबंधित लिखित शिकायत स्थानीय एवं राज्य जनसंपर्क विभाग के साथ-साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, नई दिल्ली को भी भेजे जाने की जानकारी सामने आई है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
हालांकि, इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों, भूमिका और संरक्षण से संबंधित बिंदुओं का विस्तृत खुलासा हमारी टीम की आगे की जांच के बाद अगले अंक में किया जाएगा।
मामले को संज्ञान में लेते हुए पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 174 के तहत NCR क्रमांक 0017/2026, दिनांक 22 जनवरी 2026 को दर्ज की है। पुलिस द्वारा शिकायतकर्ता को संबंधित न्यायालय में आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए मार्गदर्शन भी दिया गया है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या कुछ लोग पत्रकारिता की स्वतंत्रता को जिम्मेदारी के बजाय दबाव, व्यक्तिगत स्वार्थ और गलत प्रचार का माध्यम बना रहे हैं? वहीं, निष्पक्ष पत्रकारिता की साख बनाए रखने के लिए तथ्यों की पुष्टि, संतुलन और जवाबदेही की आवश्यकता पर भी बहस तेज हो गई है।



